कुछ हाइकु की कोशिश
देखिये
लो धराशायी
हो गये सब स्वप्न
आहत मन
पोसती धूप
अंकुरित जीवन
निखरा रूप
ढूंढ रही थी
भीतर था अमृत
कर लूं संचित
माथे का बोसा
अंकित अधर पे
रखा भरोसा
तेरा बुलावा
ख्वाबो में रंग लाया
पर सताया😢😢
अश्रूपूरित
नैनन सजनी के
भावनीहित
जीवन मृत्यु
बस दो ही नगमें
कैसी कसमें
परदेसी वो
जियरा तड़पाये
रहा न जाये
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