Tuesday, 2 May 2017

सरफराज़ खान

कुछ हाइकु की कोशिश
देखिये

लो धराशायी
हो गये सब स्वप्न
आहत मन

पोसती धूप
अंकुरित जीवन
निखरा रूप

ढूंढ रही थी
भीतर था अमृत
कर लूं संचित

माथे का बोसा
अंकित अधर पे
रखा भरोसा

तेरा बुलावा
ख्वाबो में रंग लाया
पर सताया😢😢

अश्रूपूरित
नैनन सजनी के
भावनीहित

जीवन मृत्यु
बस दो ही नगमें
कैसी कसमें

परदेसी वो
जियरा तड़पाये
रहा न जाये

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