प्यार का गीत,
लिखती हैं, जिंदगी
मन का मीत,
लिखती हैं, जिंदगी,
प्यार का रंग हैं, जिंदगी
प्यार की उमंग हैं, जिंदगी
दिल की धड़कन हैं, जिंदगी
दिल की सांसों में हैं, जिंदगी
जीवन की खुशी हैं, जिंदगी
जीवन का गम भी हैं, जिंदगी
आती-जाती हर सांस में हैं,जिंदगी
कभी जिंदगी की हार
लिखती हैं, जिंदगी
कभी जिंदगी की जीत
लिखती हैं, जिंदगी
हर ख्वाब में हैं, जिंदगी
हर खयाल में हैं, जिंदगी
दिलों जान हैं, जिंदगी
दिलों शान हैं, जिंदगी
दिलों का गुमान हैं, जिंदगी
दिलों का अरमान हैं, जिंदगी
दिलों का नाम हैं, जिंदगी
दिलों का पैगाम हैं, जिंदगी
कहां-कहां नहीं हैं,जिंदगी
चारों तरफ हैं, जिंदगी
जीवन ही जिंदगी का नाम हैं,
जीना ही, जिंदगी का पैगाम हैं
***आर.डी.वैरागी***स्वरचित***
UR***🙏🏽📝✍🏽🌿🍃🍂👏
कहीं तो कोई
उम्मीद का दीया
जलाकर बैठा हैं,
सब एक जैसे
लिपिक भाई नहीं जो
ना उम्मीद का दीया
जलाकर बैठा हो,
जिसने दीया
जलाया ही नहीं,
बस उससे पूछना बाकी हैं
क्या तुम्हारे उम्मीद के
दीये का तेल खत्म
हो गया हैं, क्या....?
उम्मीद का दीया तो
हम भी जलाकर बैठे हैं,
कब तक यह ,मान कर बैठे
अब उजाला होने वाला हैं,
पता नहीं, अंधेरों से
निजात कब मिलेगी...।?
🙏🏽📝✍🏽आर.डी.वैरागी**
*🌾🌿🍃🍂👏
जीवन में कई,
रंग भरे हैं,
चाहत के रंग से,
कब उभरे हैं,
दिल की चाहतों ने,
कभी घाव दिये हैं,
कभी घाव भरे हैं,
जीवन में कई,
रंग भरे हैं,
चाहत के ये कितने,
नज़ाकत रिश्ते
चाहत के ये कितने,
शरारत रिश्ते,
कितने उथले,
कितने गहरे हैं,
जीवन में कई,
रंग भरे हैं,
सागर हैं, कितना गहरा
उस पर हैं, लहरों का पहरा
दरियाओं का किनारा,
उसका हैं, सहारा
सागर ने भी,
कितने जख्म सहे हैं,
जो साहिल से कहे हैं,
जीवन में कई,
रंग भरे हैं
🏽आर.डी.वैरागी*
🍀🌺💕❤💕☘💐🌾👏
🕯🎄🕯🎄🕯🎄🕯🎄
नींव से नभ तक इमारत--
गेती फावड़ा और तगारी
नहीं हैं कोई लाचारी
नहीं हैं कोई मजबूरी
मेहनत से
नहीं हैं कोई दूरी
श्रम के खून पसीने से
नींव से नभ तक
खड़ी की गई हैं, इमारत
शुकून हैं, उस मजदूर को
उस आलीशान भवन में
कोई रहता हैं,
रहने वाला वह मालिक
कभी नहीं सोचता
जिस में,मैं निवास करता हूं
उसमें किसी मजदूर का
कभी खून-पसीना बहा हैं,
जो आज भव्य इमारत खड़ी हैं,
वह कहाँ हैं, वह और कहीं
इसी तरह अपना,
खून-पसीना बहा रहा होगा,
किसी पेड़ के नीचे या
कोई झुग्गी-झोपड़ी बनाकर
किसी दूसरी इमारत के लिये
फिर से,मेहनत-मजदूरी
पाने का इंतज़ार कर रहा होगा
हमेशा श्रम के लिये तत्पर
अपनी पेट की आग,बुझाने के लिये
सपने बुन रहा होगा
नमन उस मजदूर को जो
आशियाना बनाता हैं
खुद जमीन पर सोता हैं,
फिर भी खुशहाल
जिंदगी जीता हैं,
यह उसके "श्रम का पुरूस्कार" हैं
*आर.डी. वैरागी*
2
संघर्ष भी हैं जिंदगी,
हर्ष भी हैं जिंदगी
कर्ज़ भी हैं जिंदगी
फर्ज़ भी हैं जिंदगी
मर्ज भी हैं जिंदगी
दर्द भी हैं जिंदगी
दवा भी हैं जिंदगी
दुआ भी हैं जिंदगी
खेलना भी हैं जिंदगी
हंसना भी हैं जिंदगी
रोना भी हैं जिंदगी
जीद करना भी हैं जिंदगी
पढ़ना भी हैं जिंदगी
जीवन के हर रिश्तों में हैं जिंदगी
आर.डी.वैरागी
🎄🎄🎄🎄🎄🎄🎄
जीवन की कोई
किताब लिखूंगा,
उसमें सुख-दुःख का,
कोई हिसाब लिखूंगा,
दिल में उठे दर्द का,
कोई जवाब लिखूंगा,
जीवन में मिले,प्यार का
कोई खिताब लिखूंगा,
आंखों में आये यदि,
गम के आंसू,
उसको मेरा,सलाम लिखूंगा
आंखों में आये यदि,
खुशी के आंसू,
उसको जीवन का,पैगाम लिखूंगा
पल-पल आये हमदर्द की याद
उसे सरेआम लिखूंगा
मोहब्बत हैं,"जिंदगी"
जो बनाई हैं, रब ने
मैं उसके नाम लिखूंगा
"मैं",मैं-नहीं
"हमदम" उसका नाम लिखूंगा
**आर.डी.वैरागी**
🎄🕯🎄🕯🎄🕯🎄🕯
🙏🏽📝✍🏽गुहा साहब🇮🇳👏
शर्म आती नहीं, शर्म की जाती हैं
बेशर्मों को उनकी जबान में ही
बात की जाती हैं,
बुज़दिल ही कायराना हरकत करते हैं
हमारे जांबाज तो वतन पर
शहीद होते हैं, मरते हैं
उनकी कुर्बानी कहीं व्यर्थ न जाये
कोई फैसला ऐसा संसद से आये
हौसले जवानों के बुलंद हैं
बस ऐसी कोई, चंद छूट सेना को
मिल जाये
ना कश्मीर का राग रहेगा,
ना पाकिस्तान रहेगा,
बस केवल पूरा, हिन्दुस्तान रहेगा
🏽आर.डी.वैरागी**
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