*रफ्तार*
कठिन के कठिनतम हो गई
जिंदगी की रफ्तार
इतनी तेज क्यों हो गई.....
मानता हूँ काम की है
समय सीमा
सफलता के लिए लेकिन
स्वस्थ जीना
छोटी छोटी मुश्किलें
क्यों विकराल हो गई.......
योजनाओं की बदलती
जटिलता
कार्य की हर समय रहती
अधिकता
सीधी सादी जिंदगी
क्यों जंजाल हो गई ......
काल्पनिक लगती है अब तो
फुरसतो की जिंदगी
कार्य के आधिक्य में फिर से
पिछड़ती जिंदगी
चेहरे की मासूमियत
क्यों खूंखार हो गई .......
🎄🕯🎄🕯🎄🕯🎄🕯🎄
*अवसर*
जिंदगी बहुत अस्त व्यस्त है
पर ईश्वर की कृपा है
जीवन स्वस्थ है
काम का है बोझ इतना
बुझ गया प्रत्येक सपना
लोकहित की बात लेकर
कर रहा अटूट मेहनत
विकास की रफ्तार में
आकांक्षाए पस्त हैं ......
दिल में ये सुकून है कि
योजनाएं गतिशील है
कार्य के प्रयास से ही
कल्पनाएं फलीभूत है
हम सभी को कष्ट थोड़ा
पर आमजन मस्त है....
बन सकूँ ख़ुशी का कारण
मन की ये अभिलाषा है
योजनाएं क्रियान्वित हो
अपना सबको वादा है
मिल रहा अनमोल अवसर
ईश्वर का प्रदत्त है........
( स्वरचित)
*नीरज पाराशर*
सीईओ जनपद खण्डवा
🏡🎄🕯🎄🕯🎄🕯🎄🕯🎄
*नीरज पाराशर*
(सीईओ जनपद खण्डवा)
*अहसास*
चिलचिलाती धूप में
तपता है जब तन - मन
शीतलता का अहसास कराती
तेरी याद आती क्यूँ है
घुटन सी महसूस होती है
तेरे न होने से अक्सर
तू मेरे पास से दूर - दूर
इस तरह जाती क्यूँ है
तेरा होना या न होना
कराता है अहसास जिंदगी का
जिंदगी मेरी सँवरकर
बिखर जाती क्यूँ है
तेरी हर बात खनकती है
कानो में मेरे हर पल
संगीत घोलकर भी
मन में उदासी क्यूँ है
मिलकर तुझे बताएंगे "नीरज"
दिल के जख्मो की दास्तान
बिना हथियार के घायल
यादें कर जाती क्यूँ है
🎄🕯🎄🕯🎄🕯🎄🕯🎄
*मातृ दिवस*
सब कुछ बदल जाता है
निश्चित समय के बाद
पर माँ तेरी ममता
बदलती क्यूं नही है......
जन्म के बाद शिक्षा
रिश्तों का अहसास
प्रकृति से परिचय
सब कुछ चरणबद्ध
सब कुछ मिलने पर भी
यादें फिसलती क्यूँ है
पर माँ तेरी ममता
बदलती क्यूँ नही है .......
भूल जाते है हम
पहुँचकर मंजिल पर
मानवीय अहसास को
करते हम शर्मसार
रिश्तों का गला घोंटकर हमें
शर्मिंदगी क्यूँ नही है
पर माँ तेरी ममता
बदलती क्यूँ नही है......
शर्मनाक है वर्ष में
एक दिन याद करना
जैसे सूरज से कहना
कि आज तूने धूप दी है
आत्मीय अहसास की
समझ हमे क्यूँ नही है
पर माँ तेरी ममता
बदलती क्यूँ नही है....
सब कुछ दिया जो
सम्भव था जग में
तोलने लगते है हम
भावनात्मक अहसास को
रिश्तों के पतन का अहसास
हमे क्यूँ नही है
पर माँ तेरी ममता
बदलती क्यूँ नही है......
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