Friday, 28 April 2017

जया पाठक


[09/05, 1:50 a.m.]

जिंदगी
वह भूख खाती है
प्यास पीती है
वह मौत जीती है
अपने घाव खुद सीती है ।

[09/05, 1:50 a.m.]
हम कहते हैं
बदल देगें इतिहास
वह हँस रहा है
एक कँटीली हँसी
कटाक्ष कर
कह रहा है
खुद को बदले बिना
कैसे बदलेगा इतिहास ?
बगैर फेसबुक
बगैर वाट्स एप में दर्शाये गये
नहीं होती साधना पूरी
ढिंढोरे पीट कर
इतिहास बदलना
कोई सीखे हम से

[09/05, 1:51 a.m.]

समय एक तुनक मिजाज
इंसान है ।
जो मजाक कर तो लेता है किन्तु
सहता नहीं ।

[09/05, 1:51 a.m.]
वह बर्फ है
तुम आग बन जाओ
वह पानी है
तुम पत्थर बन जाओ
वह पत्थर है
तो भला उसी में है
कि तुम नदी बनकर बह जाओ ।

[09/05, 2:28 a.m.]

रजनीगंधा यह देख कर 
हुई शर्म से लाल
भीड उन्ही के साथ थी
जिनके हाथ मशाल ।
जिनके हाथ मशाल
न पूछो बात उन्ही की
लाइक शेअर में दुबकी प्रतिभा
तिकडम ही टेलेन्ट जिन्ही की ।
दिन को कर दे रात
निशीचर बन जाये फंदा
क्यूं न हो फिर लाल
उजियारी निशिगंधा ।

🎄🎄🎄🎄🎄🎄🎄

[28/04, 16:14]

बेटियाँ खेलते खेलते बडी हो जाती है ,
पता ही नहीं चलता कि
कब खेल खत्म हो जाता है
और भाग्य का खेल शुरु हो जाता है ।

जया पाठक

👧👧👧

नन्ही मुस्कान--

किसी नन्हे बच्चे की मुस्कान
देख कर कवि ने क्या खूब लिखा है...

"दौड़ने दो खुले मैदानों में ,
इन नन्हें कदमों को साहब .!

जिंदगी बहुत तेज भगाती है ,
बचपन गुजर जाने के बाद .!!

No comments:

Post a Comment