जिंदगी के मोड़ पर
खड़ा था
जिंदगी के लिये
हर दिन मौत से
लड़ा था
पल-पल आती
पल-पल जाती
सांसों से यह
जीवन हरदम
हर रोज नई
उम्मीदों के साथ आगे
बढ़ा था।
जिंदगी को मालूम हैं
मौत जीने की राह का
एक रोड़ा था
फिर भी हर क्षण
जिंदगी जीने के लिये
मेरा कदम
प्रतिक्षण,प्रतिपल
बढ़ा था
आज मैं जिंदगी को
लिये सांसों के साथ
दौड़ रहा हूं
मुझे पता नहीं यह
जिंदगी कितनी दौड़ती हैं,
कब मुझे इस
दुनिया से,छोड़ती हैं
आर.डी.वैरागी
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