" दर्द का रिश्ता "
दर्द का रिश्ता.....
रिश्तों का दर्द......
दर्द हो हमदर्द....
दर्द तो दर्द ....
बेदर्द !क्या जाने ! दर्द......
दर्द ! कभी अकेला नहीं होता
क्षत-विक्षत-अहत
भाव-भावनाओं का सैलाब
ही होता है .......
सहानुभूति.......!
चंद अल्फाजों की .....
क्या ! अनुभूति..........
दर्द या दर्दीली.....
दर्द अपनों ने दिया या परायो
ने .........
फिर भी "दर्द" को अपना ही
कहना पड़ता है ........
दर्द तो दर्द है रिश्तों का दर्द
या हम दर्द......
कौन!मौन का दर्द....
या दर्द का मौन.....
जाने कौन......
दर्द अपना न रिश्ता फिर भी
सहना पड़ता है .....
"दर्द का रिश्ता ".....
बी.डी.गुहा रायपुर
छत्तीसगढ़✍🙏
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