*** गज़ल ***
लफ्ज़ बन कर जुबान पर आता
तीर ही था तो कमान पर आता
चाँद बनकर भी वो दूर-दूर रहा
थोड़ा नीचे तो मचान पर आता
यूँ तसव्वुर में तो सदा ही था
हो कर सच वो बयान पर आता
खुश्बुओं की तरह जो उड़ता था
फूल बनकर वो दान पर आता
रुठ जाता वो लाख हमसे पर
मान कर भी तो मान पर आता
🙏🌷 सरफ़राज़"भारतीय"🌷
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